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मेरी ज़िंदगी मेरी आबरू ये अता-ए-याद-ए-रसूल है / Meri Zindagi Meri Aabroo Ye Ata-e-Yaad-e-Rasool Hai

मेरी ज़िंदगी मेरी आबरू, ये 'अता-ए-याद-ए-रसूल है जो ये दर्द है तो क़रार-ए-जाँ, है अगर ये ज़ख़्म तो फूल है वही ज़िंदगी तो है बंदगी, कि जो वक़्फ़-ए-ना'त-ए-रसूल है जो फ़क़त उन्ही के लिए उठे, वो निगाह उन को क़ुबूल है जो तेरी निगाह में आ गया, वो बड़ी पनाह में आ गया तेरे वासिते से है मुतमइन, तेरे वासिते ही मलूल है मेरा सोज़ भी, मेरा साज़ भी, मेरा दिल भी, दिल का गुदाज़ भी मेरी चश्म-ए-तर की बहार है, मुझे जान-ओ-दिल से क़ुबूल है तू फ़िदा है हूर-ओ-क़ुसूर पर, मुझे नाज़ ज़िक्र-ए-रसूल पर तेरी ख़ुल्द कैसी है तू बता, मेरी ख़ुल्द कू-ए-रसूल है तेरे ज़िक्र की हैं ये बरकतें, मेरे बिगड़े काम सँवर गए जहाँ तेरी याद है दिल-नशीं, वहीं रहमतों का नुज़ूल है यही आरज़ू जो हो सुर्ख़रू, मिले दो जहान की आबरू मैं कहूँ ग़ुलाम हूँ आप का, वो कहें कि हम को क़ुबूल है ये बड़े नसीब की बात है, तेरे लब पे अंजुम -ए-ख़ुश-नवा ! कभी हम्द-ए-रब्ब-ए-जलील है, कभी ना'त-ए-पाक-ए-रसूल है शायर: क़मर अंजुम ना'त-ख़्वाँ: ज़ुल्फ़िक़ार अली हुसैनी राओ हस्सान अली असद meri zindagi meri aabroo ye 'ata-e-yaad-e-rasool hai jo ye...

ख़ुदाया इश्क़-ए-मुहम्मद में वो मक़ाम आए / Khudaya Ishq-e-Muhammad Mein Wo Maqam Aaye

ख़ुदाया ! 'इश्क़-ए-मुहम्मद में वो मक़ाम आए कि साँस बा'द में पहले नबी का नाम आए मेरा गदा, मेरा नौकर, मेरा ग़ुलाम आए ख़ुदा करे कि मदीने से ये पयाम आए ग़ुलाम बन के मदीने में आज तक जो गया कभी ये हो नहीं सकता कि वो नाकाम आए नबी की आल से उल्फ़त इन'आम-ए-क़ुदरत है हमारी आल की क़िस्मत पे ये इन'आम आए नज़र हो गुंबद-ए-ख़ज़रा पे, अजल आ जाए मेरी हयाती का कुछ ऐसा इख़्तिताम आए मैं अश्क-बार हुआ जब तो ये दु'आ की है ब-रोज़-ए-हश्र तेरे नौकरों में नाम आए मेरी हयात के लम्हे बसर हों ऐसे, ज़िया ! कभी दुरूद लबों पर, कभी सलाम आए ना'त-ख़्वाँ: राओ हस्सान अली असद ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरी KHudaya ! 'ishq-e-muhammad me.n wo maqaam aae ki saans baa'd me.n pehle nabi ka naam aae mera gada, mera naukar, mera Gulaam aae KHuda kare ki madine se ye payaam aae Gulaam ban ke madine me.n aaj tak jo gaya kabhi ye ho nahi.n sakta ki wo naakaam aae nabi ki aal se ulfat in'aam-e-qudrat hai hamaari aal ki qismat pe ye in'aam aae nazar ho gumbad-e-KHazra pe, ajal aa j...

सब नज़ारे हुज़ूर आप के हैं / Sab Nazare Huzoor Aap Ke Hain

आक़ा मेरे आक़ा ! आक़ा मेरे आक़ा ! आक़ा मेरे आक़ा ! आक़ा मेरे आक़ा ! आक़ा ! आक़ा ! आक़ा ! आक़ा ! सब नज़ारे, हुज़ूर ! आप के हैं चाँद-तारे, हुज़ूर ! आप के हैं सब नज़ारे, हुज़ूर ! आप के हैं हम ग़ुलामों को ख़ौफ़ क्यूँ होगा जब सहारे, हुज़ूर ! आप के हैं सब नज़ारे, हुज़ूर ! आप के हैं या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह ! क्यूँ न होता ये चाँद दो टुकड़े चाँद दो टुकड़े हो जाता है, जब आक़ा करें इशारा मुझ बेकस 'आसी फ़क़ीर को बस आक़ा का है सहारा क्यूँ न होता ये चाँद दो टुकड़े जब इशारे, हुज़ूर ! आप के हैं सब नज़ारे, हुज़ूर ! आप के हैं आक़ा ! आक़ा ! आक़ा ! आक़ा ! फ़ातिमा-ओ-'अली, हुसैन-ओ-हसन नूर सारे, हुज़ूर ! आप के हैं सब नज़ारे, हुज़ूर ! आप के हैं आक़ा मेरे आक़ा ! आक़ा मेरे आक़ा ! ख़ौफ़ क्यूँ होगा डूबने का हमें सब किनारे, हुज़ूर ! आप के हैं सब नज़ारे, हुज़ूर ! आप के हैं या रसूलल्लाह ! या हबीबल्लाह ! आप हैं आसरा ग़रीबों का ग़म के मारे, हुज़ूर ! आप के हैं सब नज़ारे, हुज़ूर ! आप के हैं क़मर ! घर जिस ने सारा वार दिया वो दुलारे, हुज़ूर ! आप के हैं सब नज़ारे, हुज़ूर ! आप के हैं आक़ा ! आक़ा ! आक़ा ! आक़ा ! शायर: हनीफ़ क़मर अबदी ना...

है इतनी शदीद अब तो तमन्ना-ए-मदीना | हर साँस से आती है सदा हाए मदीना | मदीना मदीना / Hai Itni Shadeed Ab To Tamanna-e-Madina | Har Sans Se Aati Hai Sada Hae Madina | Madina Madina

मदीना मदीना मदीना मदीना ! मदीना मदीना मदीना मदीना ! हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना ! मदीना मदीना ! है इतनी शदीद अब तो तमन्ना-ए-मदीना हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना ! मदीना मदीना ! इस ने भी मदीना देख लिया, उस ने भी मदीना देख लिया वो दिन भी तो आए मैं भी कहूँ, मैं ने भी मदीना देख लिया हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना ! ऐ बाद-ए-सबा ! पैग़ाम मोरा, सुल्तान-ए-मदीना को दीजो हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना ! मदीना मदीना ! मदीना मदीना ! मदीना मदीना मदीना मदीना ! कोई पर्दे छलियाँ दे, कोई पर्दे छलियाँ दे रस्ते नैं भुल दे तयबा दियाँ गलियाँ दे हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना ! जिंद गोर गुमावाँ मैं, जिंद गोर गुमावाँ मैं हिक वारी सद सोहणिया ! फिर मुड़ के न आवाँ मैं हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना ! मिट्टी पाक मदीने दी, मिट्टी पाक मदीने दी अखियाँ दा सुरमा ए सानूँ ख़ाक मदीने दी हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना ! क्या बात ख़ज़ीने दी, क्या बात ख़ज़ीने दी सारा जग खाँदा ए ख़ैरात मदीने दी हर साँस से आती है सदा, हाए मदीना ! होवे ख़ैर सफ़ीने दी, होवे ख़ैर सफ़ीने दी माण ग़ुलामाँ दा वसे झोक मदीन...

बंदा तो गुनहगार है रहमान है मौला / Banda To Gunahgar Hai Rehman Hai Maula

बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला बंदे पे करम करना तेरी शान है, मौला ! बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला मायूस है क्यूँ रहमत-ए-बारी से बता दे अल्लाह के दरबार में सर अपना झुका दे फिर देख तेरा कितना निगहबान है मौला बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला देता हूँ तुझे वास्ता मैं प्यारे नबी का देता हूँ तुझे वास्ता मैं आल-ए-नबी का भर दे मेरा दामन, तेरी क्या शान है, मौला ! बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला है शुक्र तेरा, तू ने मुझे कितना दिया है मुझ जैसे गुनहगार पे ये कैसी 'अता है गुन गाउँ तेरे क्यूँ न मैं ? एहसान है, मौला ! बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला होता है करम सब पे, ये दाता का नगर है बिछड़े हुए मिलते हैं जहाँ, ये वही दर है मिल जाएगी मंज़िल, मेरा ईमान है, मौला ! बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला बंदा तो गुनहगार है, रहमान है मौला होता है करम सब पे, ये दाता का नगर है करता है करम सब पे जहाँ, ये वही दर है मिल जाएगी मंज़िल, मेरा ई...

इमदाद कुन इमदाद कुन या ग़ौस-ए-आज़म दस्तगीर / Imdad Kun Imdad Kun Ya Ghaus-e-Azam Dastagir | Imdad Kun Imdad Kun Ya Ghous-e-Azam Dastagir

इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ रंज-ओ-ग़म आज़ाद कुन दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुन दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! असीरों के मुश्किल-कुशा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! फ़क़ीरों के हाजत-रवा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुन दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! गिरा है बलाओं में बंदा तुम्हारा मदद के लिए आओ, या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुन दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! तेरे हाथ में हाथ मैं ने दिया है तेरे हाथ है लाज, या ग़ौस-ए-आ'ज़म ! इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुन दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! निकाला है पहले तो डूबे हुओं को और अब डूबतों को बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुन दर दीन-ओ-दुनिया शाद कुन, या ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! भँवर में फँसा है सफ़ीना हमारा बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! बचा, ग़ौस-ए-आ'ज़म ! इमदाद कुन, इमदाद कुन, अज़ बंदे ग़म आज़ाद कुन द...

मेरा गदा मेरा मँगता मेरा ग़ुलाम आए / Mera Gada Mera Mangta Mera Ghulaam Aae

मेरा गदा, मेरा मँगता, मेरा ग़ुलाम आए ख़ुदा करे, कभी तयबा से ये पयाम आए दुरूद-ए-सय्यिद-ए-कौनैन के वसीले से मेरी ज़ुबान पे, आक़ा ! तेरा ही नाम आए मैं इस यक़ीन से आया हूँ उन के रौज़े से वो फिर कहेंगे कि वापस मेरा ग़ुलाम आए मैं देखता ही रहूँ बस तुम्हारे रौज़े को जनाब-ए-ज़हरा के सदक़े में ऐसी शाम आए ग़ुलाम-ए-ज़हरा हूँ, मैं तो 'अली का नौकर हूँ हमेशा पंज-तनी निस्बत ही मेरे काम आए हसन हुसैन का देता हूँ वास्ता उन को फ़क़ीर-ए-आल-ए-मुहम्मद में मेरा नाम आए हसन हुसैन का देता है वास्ता मिस्कीं फ़क़ीर-ए-आल-ए-मुहम्मद में मेरा नाम आए ना'त-ख़्वाँ: ज़ोहैब अशरफ़ी राओ हस्सान अली असद उमैर ज़ुबैर mera gada, mera mangta, mera Gulaam aae KHuda kare, kabhi tayba se ye payaam aae durood-e-sayyid-e-kaunain ke waseele se meri zubaan pe, aaqa ! tera hi naam aae mai.n is yaqeen se aaya hu.n un ke rauze se wo phir kahenge ki waapas mera Gulaam aae mai.n dekhta hi rahu.n bas tumhaare rauze ko janaab-e-zahra ke sadqe me.n aisi shaam aae Gulaam-e-zahra hu.n, mai.n to 'ali ka naukar hu.n ham...

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे / Apni Rahmat Ke Samundar Mein Utar Jaane De

अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे न मैं तख़्त मंगाँ, न मैं ताज मंगाँ न मैं मंगदी हाँ मैनूँ ज़र मिल जाए अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे सू-ए-बतहा लिए जाती है हवा-ए-बतहा बू-ए-दुनिया ! मुझे गुमराह न कर, जाने दे बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे तेरी सूरत की तरफ़ देख रहा हूँ, आक़ा ! पुतलियों को इसी मर्कज़ पे ठहर जाने दे बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे ख़्वाहिश-ए-ज़ात ! बहुत साथ दिया है तेरा अब जिधर मेरे मुहम्मद हैं उधर जाने दे बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे ज़िंदगी ! गुम्बद-ए-ख़ज़रा ही तो मंज़िल है मेरी मुझ को हरियालियों में ख़ाक-बसर जाने दे बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे मौत पर मेरी शहीदों को भी रश्क आएगा अपने क़दमों से लिपट कर मुझे मर जाने दे बे-ठिकाना हूँ अज़ल से, मुझे घर जाने दे अपनी रहमत के समुंदर में उतर जाने दे रोक, रिज़वाँ ! न...

आप हैं बहार या नबी, दिल का हैं क़रार या नबी / Aap Hain Bahaar Ya Nabi, Dil Ka Hain Qaraar Ya Nabi

आप हैं बहार, या नबी ! दिल का हैं क़रार, या नबी ! हैं रुत्बे आप की वजह जितने आए अम्बिया आप हैं सालार, या नबी ! दिल का हैं क़रार, या नबी ! आप हैं बहार, या नबी ! दिल का हैं क़रार, या नबी ! चेहरे पे हों रौनक़ें लब ख़ुशी से खिल उठें कहूँ मैं जितनी बार, 'या नबी' दिल का हैं क़रार, या नबी ! आप हैं बहार, या नबी ! दिल का हैं क़रार, या नबी ! जब तलक है जाँ में जाँ मिले जो दूसरा जहाँ करूँ मैं तुझ से प्यार, या नबी ! दिल का हैं क़रार, या नबी ! आप हैं बहार, या नबी ! दिल का हैं क़रार, या नबी ! शफ़ा'अतों की ख़ैर दे अपनी कमली के तले छुपाएँ ख़ाकसार, या नबी ! दिल का हैं क़रार, या नबी ! आप हैं बहार, या नबी ! दिल का हैं क़रार, या नबी ! कहे न क्यूँ ये हैदरी अबू-बकर, 'उमर, ग़नी 'अली भी तेरे यार, या नबी ! दिल का हैं क़रार, या नबी ! आप हैं बहार, या नबी ! दिल का हैं क़रार, या नबी ! शायर: इरफ़ान उमर हैदरी ना'त-ख़्वाँ: राओ हस्सान अली असद aap hai.n bahaar, ya nabi ! dil ka hai.n qaraar, ya nabi ! hai.n rutbe aap ki wajah jitne aae ambiya aap hai.n saalaar, ya...

कंकर से कलमा पढ़वाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! / Kankar Se Kalma Padhwaao, Phir Kehna, Ham Jaise The !

कंकर से कलमा पढ़वाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! डूबे सूरज को लौटाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! तुम भी ज़रा मेअ'राज को जाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! जाओ नमाज़ें ले कर आओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! कंकर से कलमा पढ़वाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! डूबे सूरज को लौटाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! लोहे से तलवार बनाना आम है दुनिया में लेकिन टहनी को तलवार बनाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! कंकर से कलमा पढ़वाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! डूबे सूरज को लौटाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! पेशानी पर दाग़ बनाना कोई मुश्किल काम नहीं नक़्श-ए-क़दम पत्थर पे बनाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! कंकर से कलमा पढ़वाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! डूबे सूरज को लौटाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! बाम-ओ-दर-ओ-दीवार सलामी देने लगें कुछ ऐसा करो पेड़ को अपने पास बुलाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! कंकर से कलमा पढ़वाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! डूबे सूरज को लौटाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! ऊपर जाना, नीचे आना, ये तो बशर की ताक़त है जन्नत से तुम हो कर आओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! कंकर से कलमा पढ़वाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! डूबे सूरज को लौटाओ, फिर कहना, हम जैसे थे ! मेरे नबी की ...

इमाम-ए-अम्बिया, हबीब-ए-किब्रिया, मेरे हुज़ूर दी कोई मिसाल नैं / Imam-e-Ambiya, Habib-e-Kibriya, Mere Huzoor Di Koi Misaal Nain

फिरे ज़माने में चार जानिब, निगार-ए-यकता तुम्हीं को देखा हसीन देखे, जमील देखे, बस एक तुमसा तुम्हीं को देखा इमाम-ए-अम्बिया, हबीब-ए-किब्रिया, मेरे हुज़ूर दी कोई मिसाल नैं हुस्न दी इंतिहा, मुहम्मद मुस्तफ़ा, मेरे हुज़ूर दी कोई मिसाल नैं इमाम-ए-अम्बिया वल-फ़ज्र जिस दी पेशानी, सोहणा यासीन सेहरा ऐनुल्लाह अखियाँ नूरानी, वजहुल्लाह है चेहरा शीरीं सुख़न, रूह-ए-चमन, शाह-ए-ज़मन शफ़ी-ए-आसियाँ, नबी ख़ैरुल-वरा, मेरे हुज़ूर दी कोई मिसाल नैं इमाम-ए-अम्बिया, हबीब-ए-किब्रिया, मेरे हुज़ूर दी कोई मिसाल नैं इमाम-ए-अम्बिया मुख चंद बदर शअशानी ए मथे चमके लाट नुरानी ए काली ज़ुल्फ़ ते अख मस्तानी ए मख़्मूर अखीं हेन मद भरियाँ नूर-ए-ख़ुदा जैसा कोई एथे होणा न आया सानी कींवें उस दा होवे, जेदा दिस दा नैं साया त़ाहा ज़बीँ, माह-ए-मुबीँ, सब तों हसीँ जिनूँ सादिक़ अमीन है दुश्मन आख दा, मेरे हुज़ूर दी कोई मिसाल नैं इमाम-ए-अम्बिया, हबीब-ए-किब्रिया, मेरे हुज़ूर दी कोई मिसाल नैं इमाम-ए-अम्बिया हसनैन दा सोहणा नाना, चन तोड़े ते जोड़े उँगली दा कर के इशारा, सोहणा सूरज नूं मोड़े शम्सुद्दुहा, बदरुद्दुजा, सल्ले अला जिन्हां पथराँ तों ...